समस्तीपुर सदर अस्पताल में एक सप्ताह से अल्ट्रासाउंड मशीन खराब, रोज 50 मरीज लौट रहे निराश

Date: 2026-10-14
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समस्तीपुर: सदर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल के ओपीडी भवन में लगी अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले करीब एक सप्ताह से खराब पड़ी है। इसके कारण प्रतिदिन लगभग 40 से 50 मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड जांच कराए ही लौटना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा बाधित होने से खासकर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

निजी सेंटरों में जांच कराने को मजबूर मरीज

सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों को उम्मीद रहती है कि उन्हें सरकारी व्यवस्था के तहत कम खर्च में जरूरी जांच की सुविधा मिलेगी। लेकिन अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने के कारण चिकित्सकों की सलाह पर जांच कराने वाले मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे जांच शुल्क के साथ आने-जाने का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है।

सरायरंजन से आए देवश झा ने बताया कि सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलने से उन्हें राहत मिलती, लेकिन मशीन खराब होने के कारण अब उन्हें निजी सेंटर में जांच करानी पड़ रही है।

गर्भवती महिलाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

अस्पताल के ओपीडी भवन की मशीन खराब होने के बावजूद गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार के अनुसार, गर्भवती महिलाओं की जांच एमसीएच भवन के लेबर रूम में की जा रही है। हालांकि, अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने में परेशानी हो रही है।

मशीन के प्रोब में खराबी, कंपनी को दी गई सूचना

डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन के प्रोब में तकनीकी खराबी आई है। इस संबंध में संबंधित कंपनी को सूचना दी गई है। कंपनी के इंजीनियर ने अस्पताल पहुंचकर मशीन की जांच भी की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले सप्ताह तक मशीन को ठीक कर दिया जाएगा।

अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट आनंद कुमार के माध्यम से अल्ट्रासाउंड जांच की जा रही थी। संबंधित मशीन काफी पुरानी हो चुकी है। अब मशीन की मरम्मत के बाद ओपीडी भवन में जांच सेवा दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।

मरीजों को मरम्मत का इंतजार

अल्ट्रासाउंड सेवा बाधित होने से मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। अब सभी की नजर मशीन की मरम्मत और जांच सेवा दोबारा शुरू होने पर टिकी है। यदि मशीन जल्द ठीक हो जाती है, तो सदर अस्पताल आने वाले मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर निर्भरता से राहत मिल सकती है।

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