नववर्ष को “सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि यह सवाल कि हम किस तरह के इंसान बनना चाहते हैं” बताते हुए फिल्मकार, लेखक और जनसेवक एन. मंडल ने बुधवार को करुणा, सेवा और जिम्मेदारी की ओर बढ़ने का आह्वान करते हुए एक विचारोत्तेजक सार्वजनिक संदेश जारी किया।
अपने संदेश में एन मंडल ने कहा कि नववर्ष “अहंकार के उत्सव के रूप में नहीं बल्कि विनम्रता के अभ्यास के रूप में आना चाहिए” और जाति, भाषा और धर्म के विभाजनों से ऊपर मानवीय मूल्यों को रखने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व से सत्ता से अधिक कर्तव्य को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि नेतृत्व को भाषणों से नहीं बल्कि ज़मीनी सेवा से आँका जाना चाहिए। “कुर्सियाँ जिम्मेदारी से ऊँची न हों,” उन्होंने कहा।
किसानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए मंडल ने कहा कि देश का पेट भरने वालों को देश की आत्मा के रूप में सम्मान मिलना चाहिए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गरिमा, न्यायसंगत अवसर और सुरक्षा की आवश्यकता बताई।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने उनसे भीड़ के अनुयायी बनने के बजाय दिशा के निर्माता बनने का आग्रह किया और कलाकारों से सत्य की स्वतंत्र आवाज़ बने रहने की अपील की, न कि बाज़ार की वस्तु बनने की।
उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि विकास नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित न रहे बल्कि गाँवों में पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के रूप में दिखाई दे।
“नववर्ष हमें जितना हम उसे पढ़ते हैं उतना ही हमें पढ़े — और जितना हम बदलाव की बात करते हैं उतना ही हमें बदले,” मंडल ने कहा।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्ष में लोग थोड़ा अधिक सच बोलें, थोड़ा कम नुकसान पहुँचाएँ और थोड़ा अधिक मानवीय बनें।
एन. मंडल लेखक, फिल्म संपादक और निर्देशक हैं तथा ‘गाम घर डिजिटल मीडिया’ के संस्थापक-संपादक हैं।