बिहार विधानसभा में छह अहम विधेयक पारित, फीस नियंत्रण और सूदखोरों पर सख्ती

Date: 2026-02-27
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बिहार विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने छह महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए। इन विधेयकों को आम जनता, खासकर गरीब और मध्य वर्ग को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। अब ये विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून का रूप ले लेंगे।


सबसे अहम विधेयक ‘बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (धन उधार विनियम एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण)’ है। इसका उद्देश्य निजी सूदखोरों और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा की जा रही कथित जबरन वसूली और उत्पीड़न पर रोक लगाना है। कानून लागू होने के बाद जबरन वसूली या अमानवीय व्यवहार साबित होने पर दोषियों को पांच साल तक की जेल और 5 से 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष न्यायालय गठित किए जाएंगे।


इसके अलावा निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों की फीस पर नियंत्रण संबंधी विधेयक भी पारित किया गया। इस कानून के लागू होने पर सरकार निजी प्रोफेशनल संस्थानों में नामांकन और फीस संरचना को नियंत्रित करेगी। कैपिटेशन फीस पर पूरी तरह रोक रहेगी और एक उच्च स्तरीय समिति विभिन्न मदों में वसूले जाने वाले शुल्क की निगरानी करेगी। इससे मध्य वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


वहीं ‘बिहार जन विश्वास (प्रावधान संशोधन)’ विधेयक के जरिए उद्योगपतियों और निवेशकों को भी राहत दी गई है। छोटे तकनीकी या प्रक्रियागत उल्लंघनों के मामलों में अब सीधे जेल भेजने के बजाय आर्थिक दंड लगाया जाएगा, जिससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।


सरकार का दावा है कि इन विधेयकों से सामाजिक न्याय, शिक्षा सुधार और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

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