समस्तीपुर में भीषण गर्मी का कहर: 40°C तापमान से सब्जी और मक्का की फसल झुलसी, किसानों की बढ़ी चिंता

Date: 2026-04-25
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EXPOSE BIHAR DESK

📍 समस्तीपुर

बिहार के समस्तीपुर जिले में भीषण गर्मी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में लगातार 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है, जिससे खेती पर प्रतिकूल असर साफ नजर आने लगा है। तेज धूप और पछुआ हवा के कारण खेतों की ऊपरी सतह की नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिसका सीधा असर सब्जी और मक्का की फसलों पर पड़ रहा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़े हुए तापमान के कारण वाष्पीकरण दर काफी तेज हो गई है। इससे सिंचाई का पानी भी जल्दी सूख जा रहा है और पौधों पर तापीय तनाव (हीट स्ट्रेस) बढ़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर सब्जी उत्पादक किसानों पर देखा जा रहा है।

जिले के कई इलाकों में भिंडी, परवल, बैंगन और मिर्च जैसी फसलों के पौधे सूखने लगे हैं। कई जगहों पर पत्तियां झुलस रही हैं, जबकि टमाटर और खीरा की फसल दोपहर के समय मुरझा जा रही है। इससे उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ गई है।

मिर्जापुर के किसान श्याम विनोद महतो बताते हैं कि इतनी तेज गर्मी पहले कम ही देखने को मिलती थी। वे कहते हैं कि सुबह सिंचाई करने के बावजूद दोपहर तक खेत सूख जाता है और भिंडी व मिर्च के पौधे झुलसने लगे हैं। वहीं खैरा के धर्मेन्द्र महतो का कहना है कि डीजल पंप से सिंचाई करने की लागत काफी बढ़ गई है। दिन में दो बार पानी देने के बावजूद फसल संभल नहीं पा रही है।

किसान अनिल महतो के अनुसार, बैंगन और परवल की फसल पर गर्मी का सीधा असर दिख रहा है। कई पौधे सूख चुके हैं और जो बचे हैं, उनकी बढ़वार रुक गई है। वहीं किसान रामकुमार महतो ने चिंता जताई कि अगर एक सप्ताह तक यही स्थिति बनी रही तो सब्जियों की पैदावार आधी रह सकती है, जिससे आमदनी पर भारी असर पड़ेगा।

सिर्फ सब्जियां ही नहीं, मक्का की फसल भी इस भीषण गर्मी से प्रभावित हो रही है। इस समय मक्का में दाना बनने का महत्वपूर्ण चरण चल रहा है, लेकिन अधिक तापमान के कारण पौधे कमजोर पड़ रहे हैं। इससे दाना भराव प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

जिले के कई गांवों में किसान सुबह और शाम सिंचाई कर किसी तरह फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि डीजल पंप के बढ़ते इस्तेमाल से लागत में इजाफा हो रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।

कृषि विभाग के जानकारों का कहना है कि इस परिस्थिति में मल्चिंग, हल्की और बार-बार सिंचाई, तथा जैविक नमी संरक्षण उपाय अपनाकर कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में सूखी घास या पुआल बिछाकर नमी बनाए रखें।

यदि अगले एक सप्ताह तक तापमान इसी स्तर पर बना रहा, तो सब्जी उत्पादन में गिरावट तय मानी जा रही है। इसका असर बाजार में भी देखने को मिल सकता है, जहां सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। साथ ही खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए भी यह मौसम चिंता का विषय बन गया है।

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