केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए अर्थव्यवस्था, उद्योग और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े लक्ष्यों का ब्यौरा दिया। इस बजट का केंद्रीय संदेश उत्पादन-उन्मुख विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन पर केंद्रित रहा। खास घोषणाओं में बायोफार्मा सेक्टर, सेमीकंडक्टर मिशन का विस्तार और रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय प्रमुख रहे।
सबसे बड़ा संकेत सरकारी पूंजीगत खर्च में विस्तार का रहा — केंद्रीय खर्च को बढ़ाकर लगभग ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है, जिससे बुनियादी ढांचे और निर्माण गतिविधियों को गति मिलेगी। सरकार का इरादा निजी निवेश को प्रोत्साहित करते हुए व्यापक आर्थिक वृद्धि बनाए रखने का है। इस कदम से इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण और संबंधित कंपनियों को बल मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
बायोफार्मा-शक्ति: ₹10,000 करोड़ का पैकेज
स्वास्थ्य और हाइ-टेक दवाओं पर केंद्रित सरकार ने ‘बायोफार्मा शक्ति (Biopharma Shakti)’ नाम से अगले पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की। इसका लक्ष्य भारत को वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना, बायोलॉजिक दवाओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाना और क्लिनिकल-ट्रायल व रेग्युलेटरी क्षमता सुदृढ़ करना है। बजट में इसके लिए शैक्षणिक-अनुसंधान नेटवर्क का विस्तार और क्लिनिकल साइट्स के एक बड़े नेटवर्क के गठन का भी उल्लेख है।
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और टेक्नोलॉजी-धक्का
सेमीकंडक्टर पर भी बड़े निवेश का ऐलान किया गया है — India Semiconductor Mission 2.0 के तहत आवंटन बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किए जाने का प्रावधान रखा गया है। यह पहल चिप इकोसिस्टम, उपकरण-निर्माण और सप्लाई-चेन मजबूती पर केंद्रित रहेगी ताकि घरेलू उत्पादन बढ़े और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की हिस्सेदारी बढ़े।
हरित और हरित-संबंधी पहलें, छोटे कारोबार को बढ़ावा
बजट में कार्बन उत्सर्जन घटाने और क्लीन-टेक निवेश के लिए भी मदें रखी गई हैं, साथ ही छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए ग्रोथ-फंड और वित्तीय सॉफ्ट-इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की घोषणाएँ शामिल रहीं। इन पहलों से ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर रोजगार सृजन और स्थिर विकास को बल मिलेगा।
वित्तीय सुधार और विदेशी निवेश नीति में ढील
बजट में बैंकिंग सुधारों और कॉरपोरेट-बॉन्ड मार्केट तक बेहतर पहुँच के लिए उच्च-स्तरीय समितियों की घोषणा की गई है। साथ ही, विदेशी निवेश नियमों में ढील के संकेत दिये गये — सूचीबद्ध इक्विटी में व्यक्तिगत सीमा बढ़ाने और कुल विदेशी हिस्सेदारी पर पुनर्विचार के विकल्पों का उल्लेख हुआ, जिससे बड़ी पूँजी-इनफ्लो की उम्मीद है।
क्या मायने रखता है और आगे की राह
कुल मिलाकर बजट का फोकस उत्पादन-क्षेत्र, तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य-इनोवेशन पर रहा। बड़े पूंजीगत व्यय और लक्षित निवेश योजनाओं से अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलने की संभावना है, परन्तु इसकी सफलता पर कई चीजें निर्भर करेंगी — निजी निवेश की प्रतिक्रिया, ग्लोबल आर्थिक माहौल और राज्य-स्तर पर नीतिगत सहयोग। आधिकारिक दस्तावेज़ और मंत्रालय की विस्तृत घोषणाएँ भविष्य के गाइड-रोल का काम करेंगी।
सोर्स : Gaam Ghar