बिहार सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन समिति का गठन किया जाएगा और हर पंचायत में सुधा दूध का बिक्री केंद्र खोला जाएगा। यह घोषणा वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में बजट भाषण के दौरान की। यह फैसला आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय–3 कार्यक्रम के तहत लिया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि चतुर्थ कृषि रोडमैप 2026–27 के तहत डेयरी और मत्स्य पालन को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। दुग्ध उत्पादन समितियों के गठन से किसानों और पशुपालकों को दूध बेचने का सीधा और पारदर्शी मंच मिलेगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और उत्पादकों को उनके दूध का उचित मूल्य मिल सकेगा।
डेयरी विकास को मजबूत करने के लिए मधेपुरा में 50 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाला आधुनिक शीतक केंद्र स्थापित किया जाएगा। इससे दूध के भंडारण और परिवहन की व्यवस्था बेहतर होगी और गुणवत्ता बनी रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में दुग्ध उत्पादन और विपणन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
पशुधन सेवा को आधुनिक बनाने की दिशा में भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। पशु अस्पतालों में 24 घंटे चिकित्सा सेवा, डिजिटल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था की जाएगी। इससे पशुओं की गर्भ जांच और बीमारियों का त्वरित इलाज संभव होगा।
इसके अलावा बकरी और सूकर विकास योजनाओं के तहत प्रजनन एवं प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सरकार का कहना है कि डेयरी और पशुपालन योजनाओं से गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे युवाओं को गांव में ही रोजगार मिलेगा और पलायन रुकेगा। कुल मिलाकर यह निर्णय आत्मनिर्भर बिहार की दिशा में एक मजबूत और दूरगामी पहल माना जा रहा है।