Mangal Antardasha: मंगल की अंतर्दशा में इन उपायों से करें हनुमान जी को प्रसन्न, बन जाएंगे सारे बिगड़े काम

Date: 2026-02-10
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सनातन धर्म में मंगलवार का खास महत्व है। कहते हैं कि मंगलवार के दिन हनुमान जी की भेंट भगवान श्रीराम से हुई थी। इसके लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी को बेहद प्रिय है। इस दिन राम परिवार संग हनुमान जी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही मंगलवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।

ज्योतिष कुंडली में मंगल मजबूत करने के लिए हनुमान जी की पूजा करने की सलाह देते हैं। हनुमान जी की पूजा करने से करियर और कारोबार में मनमुताबिक सफलता मिलती है। आइए, मंगल की प्रत्यंतर दशा के बारे में जानते हैं-

मंगल देव
मंगल देव को भूमि पुत्र भी कहा जाता है। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल देव हैं। मकर राशि के जातकों पर मंगल देव की असीम कृपा बरसती है। हनुमान जी की पूजा करने से मंगल देव प्रसन्न होते हैं। अपनी कृपा साधक पर बरसाते हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति विशेष के आत्मविश्वास और ऊर्जा में अपार वृद्धि होती है।


मंगल की अंतर्दशा दशा (Vedic Astrology Mars Calculation)
ज्योतिषियों की मानें तो मंगल की महादशा 7 साल की होती है। वहीं, मंगल की महादशा में सबसे पहले मंगल की अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा चलती है। महादशा और अंतर्दशा के दौरान शुभ और अशुभ ग्रहों की प्रत्यंतर दशा चलती है। मंगल की महादशा में शुभ ग्रहों की अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा में जातक को करियर और कारोबार में मनमुताबिक सफलता मिलती है।

हनुमान जी को कैसे प्रसन्न करें? (Lord Hanuman Remedies for Mangal)
अगर आप हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन स्नान-ध्यान के बाद आचमन कर लाल रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद जल में एक चुटकी कुमकुम मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अब भक्ति भाव से हनुमान जी की पूजा करें। हनुमान जी को लाल रंग अति प्रिय है। अतः पूजा के समय हनुमान जी को लाल रंग का फल, फूल और वस्त्र अर्पित करें। वहीं, पूजा के समय एक चुटकी सिंदूर हनुमान जी के चरणों में अर्पित करें। इसके बाद पंचोपचार कर हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ करें। साथ ही निम्न मंत्रों का जप करें। इस प्रकार भक्ति भाव से हनुमान जी की पूजा करने पर पवनपुत्र प्रसन्न होते हैं।

मंगलवार मंत्र
1. ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम,
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम !
श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे,
रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः !

2. अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः

3. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय
प्रकट-पराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।

4. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय रामसेवकाय
रामभक्तितत्पराय रामहृदयाय लक्ष्मणशक्ति
भेदनिवावरणाय लक्ष्मणरक्षकाय दुष्टनिबर्हणाय रामदूताय स्वाहा।

5. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय
सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
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