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बिहार की राजनीति में आज बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्य विधान परिषद से इस्तीफा देने की संभावना ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर लगातार बैठकों का दौर जारी है, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, 16 मार्च को राज्यसभा सीट जीतने के बाद नियमों के तहत नीतीश कुमार को 30 मार्च तक विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी है। इसी को लेकर आज उनका इस्तीफा संभावित माना जा रहा है।
29 मार्च को उनसे मिलने वाले नेताओं में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मंत्री विजय कुमार चौधरी, अशोक चौधरी, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और विधायक अनंत सिंह शामिल रहे। बैठक में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनसे बिहार में बने रहने का आग्रह किया।
इधर, मुख्यमंत्री पद के संभावित उत्तराधिकारी को लेकर NDA में हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं जेडीयू के कुछ नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के नाम की भी चर्चा कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद नीतीश कुमार की भूमिका सीमित हो सकती है और राज्य की राजनीति में नए नेतृत्व का उदय संभव है।
विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी के दबाव में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ रहा है और जेडीयू को कमजोर करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने 5 मार्च को मुख्यमंत्री पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी और संसद के दोनों सदनों में सदस्य बनने की बात कही थी। ऐसे में आज का दिन बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
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