नई दिल्ली। भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस साल के पद्म सम्मान उन साधारण भारतीयों को समर्पित हैं, जिन्होंने असाधारण परिस्थितियों में समाज, संस्कृति, शिक्षा, सेवा, चिकित्सा और जनकल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान दिया है। पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं, जिनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री शामिल हैं।
इस बार खास बात यह है कि सरकार ने देश के दूर-दराज़ इलाकों, आदिवासी अंचलों, पिछड़े क्षेत्रों और वंचित समुदायों से आने वाले कई ऐसे लोगों को चुना है, जिनका संघर्ष अक्सर सुर्खियों में नहीं आता, लेकिन जिनका योगदान समाज की नींव मजबूत करता है।
हालांकि 2026 के पद्म पुरस्कारों की आधिकारिक सूची केंद्र सरकार 25 जनवरी की शाम को जारी करेगी, लेकिन उससे पहले सामने आई प्रारंभिक सूची में कई प्रेरणादायक नाम शामिल हैं।
गुमनाम नायकों को मिलेगा पद्मश्री
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिन लोगों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, उनमें चिरंजी लाल यादव, धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या, बुधरी ताती, चरण हेम्ब्रम जैसे नाम प्रमुख हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा, शिक्षा, आदिवासी उत्थान और मानवीय मूल्यों को समर्पित कर दिया।
सरकार का उद्देश्य इस बार यह संदेश देना है कि राष्ट्र केवल बड़े मंचों पर काम करने वालों से नहीं बनता, बल्कि उन लोगों से बनता है जो चुपचाप गांव, कस्बों और पहाड़ों में बदलाव की मशाल जलाए रखते हैं।
पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं की संभावित सूची
प्रारंभिक सूची में जिन शख्सियतों के नाम सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं:
अंके गौड़ा, आर्मिडा फर्नांडीज, भगवानदास रायकवार, भिकल्या लाडक्या ढिंडा, बृज लाल भट्ट, बुधरी ताती, चरण हेम्ब्रम, चिरंजी लाल यादव, धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या, गफरूद्दीन मेवाती जोगी, हैली वार, इंद्रजीत सिंह सिद्धू, के पजानिवेल, कैलाश चंद्र पंत, खेम राज सुंदरियाल, कोल्लाक्कयिल देवकी अम्मा जी, कुमारसामी थंगराज, महेंद्र कुमार मिश्र, मीर हाजीभाई कासमभाई, मोहन नगर, नरेश चंद्र देव वर्मा, नीलेश विनोदचंद्र मांडलेवाला, नूरुद्दीन अहमद, ओथुवर थिरुथानी स्वामीनाथन, पद्मा गुरमेत, पोखिला लेकथेपी, पुन्नियामूर्ति नटेसन, आर कृष्णन, रघुपत सिंह, रघुवीर तुकाराम खेडकर, राजस्तपति कलियप्पा गौंडर, रामा रेड्डी ममिदी, रामचन्द्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले, एस जी सुशीलम्मा, संग्युसांग एस पोन्गेनर, शफी शौक, श्रीरंग देवबा लाड, श्याम सुंदर, सीमांचल पात्रो, सुरेश हनागावडी, तगा राम भील, तेची गुबिन, तिरुवरुर बक्तवत्सलम, विश्व बन्धु, युमनाम जात्रा सिंह।
साधारण संघर्ष, असाधारण सम्मान
पद्म पुरस्कारों का मूल उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि समाज के उन सच्चे नायकों को सम्मान मिले, जो बिना किसी प्रचार के अपना जीवन लोगों की भलाई में लगा देते हैं। इनमें कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने:
▪️ आदिवासी और पिछड़े इलाकों में शिक्षा का अलख जगाया
▪️ महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कीं
▪️ कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को बचाने में जीवन लगा दिया
▪️ प्राकृतिक आपदाओं और कठिन परिस्थितियों में समाज के लिए ढाल बने
इनमें से कई लोगों ने गरीबी, बीमारी और सामाजिक भेदभाव के बावजूद कभी हार नहीं मानी और दूसरों की जिंदगी रोशन करने का रास्ता चुना।
सरकार का संदेश
सरकार का कहना है कि पद्म पुरस्कार केवल सम्मान नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक को यह संदेश हैं कि अगर नीयत साफ हो और सेवा का भाव हो, तो बिना पद या पावर के भी इतिहास रचा जा सकता है।
समारोह कब होगा?
पद्म पुरस्कारों का औपचारिक वितरण समारोह राष्ट्रपति भवन में 2026 के अप्रैल-मई महीने में आयोजित किया जाएगा, जहां राष्ट्रपति द्वारा विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
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