समस्तीपुर/पूसा से कृषि क्षेत्र के लिए गर्व की खबर सामने आई है। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े ईख अनुसंधान संस्थान, पूसा द्वारा विकसित छह गन्ना प्रभेदों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। कोपू 22436, कोपू 22437, कोपू 22439, कोपू 22440, कोपू 22441 और कोपू 22442 को प्रारंभिक प्रभेदीय प्रत्यक्षण से उन्नत प्रभेदीय प्रत्यक्षण में प्रोन्नत किया गया है।
इन प्रभेदों को यह उपलब्धि उनकी उच्च उपज क्षमता, अधिक चीनी की मात्रा तथा रोग एवं कीट प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर मिली है। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. डीएन कामत ने बताया कि किसी एक संस्थान के छह प्रभेदों—तीन अगात और तीन मध्य पछात—को एक साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना अत्यंत गौरव की बात है। इससे बिहार के कृषि अनुसंधान को नई पहचान मिली है।
इस उपलब्धि की जानकारी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के तहत आयोजित ऑनलाइन बैठक में साझा की गई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान) की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में देशभर के गन्ना प्रजनन एवं पौधा संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक शामिल हुए। संस्थान के निदेशक डॉ. देवेन्द्र सिंह और कुलपति डॉ. पीएस पाण्डेय के मार्गदर्शन में शोध कार्यों को गति मिली है।
डॉ. कामत ने बताया कि ‘राजेन्द्र गन्ना-3 (कोपू 18437)’ को बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम में व्यवसायिक खेती के लिए चिन्हित किया गया है। यह प्रभेद शीघ्र ही अधिसूचित होने की संभावना है, जिसके बाद अन्य राज्यों में भी इसकी व्यावसायिक खेती शुरू हो सकेगी।
बिचड़ा उत्पादन के मामले में भी संस्थान ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इस वर्ष 20,497 गन्ना बिचड़े उगाकर संस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि 2023 में 64 हजार बिचड़े उत्पादन के साथ प्रथम स्थान पर था। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन उन्नत प्रभेदों से किसानों की आय में वृद्धि होगी और गन्ना उत्पादन को नई दिशा मिलेगी।