पटना। सरकार की कड़ी कार्रवाई के बीच बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी सोमवार से सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उधर विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने आदेश दिया है कि सामूहिक अवकाश की अवधि का वेतन नहीं मिलेगा।
प्रधान सचिव ने कहा-नो वर्क, नो पे का फार्मूला होगा लागूू
इसे नो वर्क, नो पे के दायरे में रखा जाएगा। उन्होंने जिलाधिकारियों को कहा है कि अंचल मुख्यालय के वरीयतम कर्मचारी को अंचलाधिकारी का कार्यभार दे दें। इनके अलावा प्रखंड विकास पदाधिकारी, ग्रामीण विकास पदाधिकारी और डीसीएलआर को भी अंचल अधिकारी का प्रभार देने का विकल्प दिया गया है।
पत्र में कहा गया है कि इस समय विधानमंडल का बजट सत्र चल रहा है। विभाग के स्तर पर दो अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ऐसी स्थिति में अंचल कार्यालयों को रिक्त रखना जनहित में नहीं है।
पत्र में अंचलाधिकारियों की गाड़ी और कार्यालय की चाभी वापस लेने के लिए भी कहा गया है। अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश का निर्णय अपनी मांगों के समर्थन में किया है।
ग्रामीण विकास सेवा संघ का समर्थन मिला
बिहार राजस्व सेवा संघ का कहना है कि उनके संवर्ग के लिए आरक्षित पद बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दे दिए जाते हैं।
इस मामले में सरकार पटना हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना भी उचित नहीं समझती है। बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने भी राजस्व सेवा के अधिकारियों की मांगों का समर्थन किया है।
बिहार राजस्व सेवा संघ के अध्यक्ष आनंद कुमार ने कहा है कि यह लड़ाई किसी पद या व्यक्ति की नहीं है। यह बिहार प्रशासन में राजस्व सेवा के संवर्गीय अस्तित्व, सेवा-शर्तों की सुरक्षा और उच्च हाई कोर्ट के आदेशों के सम्मान की लड़ाई है।