आज पटना फैमिली कोर्ट में तेजप्रताप यादव और ऐश्वर्या राय के तलाक मामले में सुलह की तीसरी कोशिश होगी। पहले दो प्रयास विफल रहे हैं। हाईकोर्ट ने भी मध्यस्थता की सलाह दी थी। 'अनुष्का' एंगल से मामले में जटिलता बढ़ी है, जिससे कानूनी परिणाम गंभीर हो सकते हैं। यह राजनीतिक परिवारों से जुड़ा हाई-प्रोफाइल मामला है, जिसकी सुनवाई पर सबकी नजर है।
पहले दो प्रयास बेनतीजा रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि दोनों पक्ष मध्यस्थता में सहयोग करें। अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या रिश्ते में कोई नरमी आएगी या टकराव और बढ़ेगा।
मध्यस्थता की दोनों पहले कोशिशों में किन कारणों से सफलता नहीं मिली, इसकी आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है; पर पारिवारिक सूत्रों और वकीलों के मुताबिक अलग-अलग संवेदनशील मुद्दे — निजी व विवादास्पद परिस्थितियाँ — अभी भी अनसुलझी हैं। मामले में ‘अनुष्का’ एंगल की वजह से जटिलता और बढ़ी है, जिससे दोनों पक्षों की रणनीतियाँ और कानूनी दावे प्रभावित हुए हैं। इस तथ्य ने मीडिया और आम दर्शकों में घटनाक्रम को और अधिक सेंसर करने वाला बना दिया है।
फैमिली कोर्ट में आज के सत्र में मध्यस्थ अदालत द्वारा नामांकित न्यायाधिकरणी मध्यस्थ और दोनों पक्षों के वकील मौजूद रहेंगे। आम तौर पर मध्यस्थता में बच्चे-संबंधी कस्टडी, होम-अलायमेंट, संपत्ति बंटवारे और संवेदनशील व्यवहारिक मुद्दों पर गोपनीय बातचीत होती है; सफल समझौते की स्थिति में दोनों पक्ष एक आपसी समझौता ज्ञापन (settlement) पर हस्ताक्षर करते हैं और अदालत उसे मान्य कर देती है।